सपा में विपक्ष के नेता के चुनाव को लेकर सम्मति चल रही है अब देखना यह है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष किसे विपक्ष के नेता के रुप में चुनते है जो कि विपक्ष को मजबूती से बरकरार रखे।

अखिलेश यादव ने कभी सोचा नहीं होगा कि चुनावी नतीजों के आने के बाद उनपर विपक्ष के नेता को चुनने के लिए जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। विधानसभा चुनाव में अखिलेश ने खुद चुनाव नहीं लड़ा जिसके चलते वह विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी नहीं निभा सकते है। लेकिन सपा सरकार के पास विपक्ष में बैठने के लिए दो उम्मीदवार है जो विपक्ष की कमान को संभाल सकते है। जिनमें से पहला नाम आजम खां और दूसरा शिवपाल यादव है। अगर समीकरण पर गौर करे तो दोनों ही नेताओं के साथ अखिलेश की बनती नहीं, एक के साथ उनकी तल्खी चली आ रही है और दूसरा हमेशा अपने विवादीत बयानो के चलते सपा की मुश्किलों को बढ़ा देता है। इस बात पर अंतिम निर्णय पार्टी अध्यक्ष करेंगे कि 403 सदस्यों वाली विधानसभा में 325 संख्या वाले सत्ता पक्ष के लिए विपक्ष का नेता किसे बनाया जाए जो विपक्ष को मजबूती से बरकरार रखे।

वहीं दूसरी तरफ 2019 चुनाव से सत्ता में वापस लौटने के लिए अखिलेश पर अपनी पार्टी को मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी जिसमें विपक्ष नेता का बेहद बड़ा रोल होगा।

एपीएन के खास शो मुद्दा में इन्हीं पहलुओं को लेकर चर्चा की गई कि “क्या हार से कम होगी अखिलेश की शक्ति या सपा पर चलेगा अब किसका जोर?” शो की पेशकस एंकर अनंत त्यागी ने किया। इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए स्टूडियो में अलग अलग पार्टिंयों से जुड़े खास विशेषज्ञों नावेद सीद्दीकी (प्रवक्ता सपा), सुदेश वर्मा (राष्ट्रीय प्रवक्ता बीजेपी), सरबत जहां फातिमा (प्रवक्ता कांग्रेस) और गोविंद पंत राजू  (सलाहकार संपादक, एपीएन) को बतौर मेहमान बुलाया गया।

नावेद सिद्दीकी ने बताया कि जनता ने जिसे यूपी में चुना है, वह अब तक सीएम पद के लिए अपनी तस्वीर साफ नहीं कर पाए है और साथ ही अपना वजीरे आला नहीं ढूंढ पाए है। रही बात विपक्ष के नेता की तो बंद कमरे में क्या हुआ मीडिया उसे छोड़ दे, इसपर अखिलेश यादव अपनी अंतिम मोहर लगाएंगे।

सुदेश वर्मा ने बताया कि बीजेपी में अंदरुनी कोई कलह नहीं है जैसे दो राज्यों गोवा और मणिपुर में सीएम का चेहरा सामने आया उसी प्रकार उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सीएम के चेहरा सामने आ जाएंगा। यूपी एक बड़ा प्रदेश है इसकी जिम्मेदारी को कैसे और किस प्रकार निभाया जाए इसपर विचार चल रहा है? इसमें कोई कॉन्ट्रोवर्सी नहीं है। बीजेपी के पास कई ऐसे फेस है जो खुद में परिपूर्ण हैं। वहीं उन्होंने कांग्रेस प्रवक्ता पर तंज कसा कि “कांग्रेस के साथ ने साइकिल पर ब्रेक लगा दी।“

सरबत जहां फातिमा ने बताया कि पीएम जब 250 सीटों के आकड़े को पार करने की बात कर रहे थे, तब उनके दिमाग में यूपी सीएम का चेहरा तो सामने आया ही होगा न? जहां जनता ने इन्हे चुना वहां यह बेहतर सीएम भेज रहे है और जहां जनता ने इन्हे नकारा वहां इन्होंने आनन फानन में सीएम को नियुक्त किया है। इससे तो यही पता चलता है कि ”यहां दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी की पूरी दाल ही काली है।“ रही बात विपक्ष की तो वह सपा का अपना निजी मामला हैं।

गोविंद पंत राजू का मानना है कि जिस प्रकार फिल्म शोले में असरानी ने एक डायलॉग कहा था कुछ उसी प्रकार यहां राष्ट्रीय अध्यक्ष कह रहे है कि कुछ विधायक पापा के साथ जाए, कुछ विधायक चाचा के साथ जाए और बाकी के मेरे पीछे आ जाए। अब सवाल यह है कि कितने विधायक इनके साथ आते है? आगे उन्होंने कहा कि आज कि बैठक केवल परिचय की बैठक थी देखना यह है कि क्या अखिलेश अपने संरक्षण के राय को मानेगे, क्योकि मुलायम शुरु से अंत तक गठबंधन के खिलाफ थे।